पार्टी का संविधान

नवजवान संघर्ष मोर्चा का संविधानः-

अनुच्छेद – 1
संगठन का नाम

धरा: 01 – यह संगठन नवजवान संघर्ष मोर्चा के नाम से जाना जायेगा।

अनुछेद – 2
झंडा

धारा: 01 – पार्टी के झंडे का रंग सफेद एवं लाल होगा। आधा ऊपरी हिस्सा सफेद एवं निचला हिस्सा लाल होगा। झंडे की लम्बाई चैड़ाई से 1.5 गुड़ा अधिक हागी।

अनुच्छेद – 3
कार्यलय

धारा: 01 – केन्द्रीय कार्यालय – डी0 711 टाउनशिप भवनाथपुर, जिला- गढ़वा, झारखण्ड से संचालित होगा।
धारा: 02 – अन्य कार्यालय – राजधानी राँची में एक क्षेत्रीय कार्यालय एवं जिलों में जिला कार्याल, जिस जिले में एक से अधिक अनुमण्डल है उनमें अनुमण्डलीय कार्यालय एवं प्रखण्डों में प्रखण्ड कार्यालय, केन्द्रीय समिति की सहमति से संचालित किया जा सकेगा। नवजवान संघर्ष मोर्चा की केन्द्रीय समिति उपरोक्त कार्यालयों के कार्यक्षेत्र के लिए संबंधित समितियों का गठन करेगी।
धारा: 03 – पार्टी का चुनाव चिन्ह –

अनुच्छेद – 4
पार्टी का संगठनात्मक ढाँचा

नवजवान संघर्ष मोर्चा का संगठननिक ढाँचा निम्न प्रकार का होगाः-
धारा: 1- केन्द्रीय समिति:-
अध्यक्ष
कार्यकारी अध्यक्ष
प्रधान महासचिव
कोषाध्यक्ष
उपकोषाध्यक्ष
उपाध्यक्ष – 5
महासचिव – 5
सचिव – 11
संगठन मंत्री – 1
सह संगठन मंत्री – 3
कार्यकारणी सदस्य – 101-102
धारा: 2- केन्द्रीय अनुशासन समिति:-
केन्द्रीय अध्यक्ष
केन्द्रीय अध्यक्ष द्वारा नियुक्त – 4 सदस्य
धारा: 3- केन्द्रीय प्रचार समिति ( मिडियासेल ) केन्द्रीय अध्यक्ष केन्द्रीय समिति की अनुशंसा पर 5 सदस्यीय समिति।
धारा: 4- केन्द्रीय अनुषांगीक समितियाँ:-
उपधारा (क) केन्द्रीय युवा समिति
उपधारा (ख) केन्द्रीय छात्र समिति
उपधारा (ग) श्रमिक समिति:-
1.संगठित
2.असंगठित क्षेत्र
उपधारा (घ) केन्द्रीय बुद्धिजीवी समिति
उपधारा (च) केन्द्रीय पूव सैनिक समिति
उपधारा (छ) केन्द्रीय महिला समिति
उपधारा (ज) केन्द्रीय किसान समिति
उपधारा (झ) केन्द्रीय अल्पसंख्यक समिति
उपधारा (ट) केन्द्रीय अनुसुचित जाति समिति
उपधारा (ठ) केन्द्रीय अनुसुचित जन-जाजि समिति
उपधारा (ड) केन्द्रीय पिछड़ी जाति समिति
उपधारा (ढ) केन्द्रीय कर्मचारी समिति
उपधारा (त) केन्द्रीय अवकाश प्राप्त कर्मचारी प्रकोष्ठ
धारा: 5- केन्द्रीय प्रवक्ता – अध्यक्ष द्वारा नियुक्त 2 सदस्य।
धारा: 6- जिला समिति – जिले के प्रखंडो की प्रखण्ड समितियांे के 101-125 सदस्यों से जिला समिति बनेगी।
धारा: 7- नगर पालिका / नगर परिषद क्षेत्र समिति – नगरपालिका/नगर परिषद में 51 सदस्यीय समिति बनेगी।
धारा: 8- अनुमंडल समिति – जिस जिले में एक से अधीक अनुमंडल होंगे उसमे अनुमंडल समिति बनेगी। अनुमंडल में स्थित प्रखण्डों के 51 सदस्यीय समिति बनेगी।
धारा: 9- प्रखण्ड समिति – प्रखंड में स्थित पंचायतो से 51 सदस्यीय समिति बनेगी।
धारा: 10- पंचायत समिति – पंचायत में स्थित ग्रामों से 21-31 सदस्यों की पंचायत समिति बनेगी।
धारा: 12- बैठक:-
उपधारा (क) ग्राम समिति, पंचायत समिति तथा प्रखण्ड समिति
तथा जिला समितियों की साधारण बैठक कम से कम से कम माह में एक बार।
उपधारा (ख) केन्द्रीय समिति की साधरण बैठक 3 माह में एक बार।
उपधारा (ग) महाअधिवेशन – 3 साल में एक बार।
उपधारा (घ) विशेष परिस्थिति में केन्द्रीय अध्यक्ष की अनुमति से आपात परिस्थितियों में विशेष/अपात बैठक बुलाई जा सकती है।

अनुच्छेद – 5
पार्टी की सदस्यता/पात्रता

धारा: 1- पार्टी की सदस्यता:-
उपधारा (क) पात्रता – पागल, दिवालिया या देशद्रोही को छोड़कर 18 वर्ष या उससे अधिक उम्र के किसी भी साक्षर व्यक्ति को जो:-
1. भरतीय संविधान में रखता /रखती हो।
2. पार्टी की नीतियों एवं सिद्धान्तों में विश्वास रखता/रखती हो तथा
3. पार्टी सदस्यता के निम्नलिखित प्रतिज्ञा पत्र पर हस्ताक्षर करता/करती हो
मै ………………………………………………………….. पार्टी काप्राथमिक सदस्य बनना चाहता /चाहती हूँ। मेरी उम्र 18 वर्षसे अधिक है, मैं ………………………………………………………………..पार्टी के संविधान , नियमो शत्र्तों तथा अनुशासन का पालन करने का वचन देता/देती हूँ।
उपधारा (ख) प्राथमिक सदस्यता रद्द करने की प्रकिया:-
किसी सदस्य की सदस्यता रद्द करने हेतु ( अपने कार्य क्षेत्र के अन्दर ) संबंधित अध्यक्ष अधिकृत होंगे। अंतिम अधिकाकेंन्द्रीय अनुशासन समिति की अनुशंसा के आधार पर केंन्द्रीय अध्यक्ष को होगा।
उपधारा (ग) क्रियाशील सदस्य पात्रता:-
1. पार्टी का प्राथमिक सदस्य हो।
2.25 साधरण सदस्यों की नियुक्ति करवा चुका/ चुकी हो।
3.अनुशासनात्मक करवाई के तहत् कभी भी 6 माह या उससे अधिक की अवधि के लिए पार्टी से निष्कासित नहीं हुआ/ हुई हो।
उपधारा (घ) क्रियाशील सदस्यता रद्द करने की प्रक्रिया:-
किसी भी क्रियाशील सदस्य अपरिहार्य कारणें से सदस्यता रद्दकरने का अधिकार प्रखण्ड अध्यक्ष की अनुशंसा पर जिला अध्यक्ष को होगा लेकिन ईसकी अंतिम स्वीकृति अनुशासन समिति की अनुशंसा पर केन्द्रीय अध्यक्ष से लेनी होगी।
उपधारा (च) सदस्यता शुलक:-
1. 5/- प्राथमिक सदस्यता शुल्क
2. 10/- वार्षिक शुलक
उपधारा (छ) सदस्यता शुल्क का बटवारा:-
1. 5/-प्रपथमिक सदस्यता शुल्क केन्द्रीय समिति को सम्पूर्ण
2. वार्षिक शुल्क का 50 प्रतिशत: पंचायत समिति एवं प्रखण्ड समिति में बराबर-बराबर तथा शेष 50प्रतिशत: अनुमंडल समिति एवं जिला को जायेगा।
उपधारा (ज) सदस्य का नविकरण:- प्रत्येक तीसरे वर्ष के प्रथम माह में प्राथमिक सदस्यों को नवीकरण करा लेना होगा।
उपधारा (झ) आजीवन सदस्यता:- केन्द्रीय अध्यक्ष की अनुशंसा पर किसी भी प्राथमिक सदस्य को 1000/- रु0 शुल्क लेकर आजिवन सदस्यता दी जायेगी।
धारा: 2- सदस्यता से हटाना:-
1. त्याग पत्र देने पर
2. सदस्यता शुल्क नही देने पर
3. अनुशासनिक कारवाई होने पर

अनुच्छेद – 6
चुनाव प्रक्रिया

धारा: 1- केन्द्रीय समिति का चुनाव पर्यवेक्षक की उपस्थिति में महाधिवेशन में होगा।
धारा: 2- केन्द्रीय समिति द्वारा नियुक्त पर्यवेक्षक जिला समिति एवं अनुषागिक इकाईयों चुनाव के लिए अधिकृत होंगे।
धारा: 3- जिला समिति द्वारा नियुक्त पर्यवेक्षक अनुमण्डलीय समितियों, नगरपालिका / नगर परिसद समितियोें तथा प्रखण्ड समितियों, के चुनाव के लिए अधिकृत होंगे।
धारा: 4- प्रखण्ड समिति द्वारा नियुक्त पर्यवेक्षक पंचायत समितियों एवं ग्राम समितियों के चुनाव के लिए अधिकृत होंगे।

अनुच्छेद – 7
संगठन के पदाधिकारी

धारा: 1- केन्द्रीय समिति के अध्यक्ष – अध्यक्ष – 1, कार्यकारी अध्यक्ष – 1, प्रधान महासचिव – 1, कोसाध्यक्ष – 1, उपकोषाध्यक्ष – 1, उपाध्यक्ष – 5, महासचिव – 5, सचिव – 11, संगठन मंत्री – 1 तथा सह-संगठन मंत्रियों की संखया – 3 हागी।
धारा: 2-
उपधारा (1) केन्द्रीय समिति छोड़कर निचली इकाईयों में प्रत्येक में एक अध्यक्ष, जिला समिति की जरूरत केअनुसार एक कार्यकारी अध्यक्ष , 2 उपाध्यक्ष एक सचिव, 2-5 तक सह सचिव, एक संगठन सचिव , एक कोषाअध्यक्ष, एक पे्रस प्रवक्ता, प्रत्येक प्रखण्ड के अध्यक्ष, जिला समिति में केंन्द्रीय समिति के लिए नमित 5 एवं बाकि बचे अन्य संबंधित समितियों के सदस्य होंगे।
उपधारा (2) प्रखण्ड़ तथा अन्य समितियों में एक अध्यक्ष, 2 उपाध्यक्ष, एक सचिव, 2 सह-सचिव, एक संगठन सचिव, एक कोषाध्यक्ष, प्रत्येक पंचायत से एक सदस्य, जिला एवं अन्य समितियों के लिए नामित 5 व बाकि बचे प्रखण्ड व अन्य समितियों के सक्रिय सदस्य होंगे।

अनुच्छेद – 8
केन्द्रीय महासचिव

धारा: 1- गठन – केन्द्रीय, जिला, अनुमण्डल, नगरपालिका / नगर परिसद, प्रखण्ड, अनुषंगिक इकाईयो के द्वारा नामित सदस्य, विधन मण्डल एवं संसदीय समिति के सदस्यों से महाधिवेशन संपन होगा।
धारा: 2- कार्यक्षेत्र एवं शक्ति – केन्द्रीय महाधिवेशन निति निर्धारण व निर्णय की सर्वोच्च शक्ति होगा। केन्द्रीय महाधिवेशन के पास संविधान में परिवर्तन करने या संशोधन करने की शक्ति निहित होगी।
उपधारा (1) दो केन्द्रीय महाधिवेशन के बीच केन्द्रीय समिति के पास सर्वोच्च वैधानिक शक्ति होगी जिसके प्रभारी केन्द्रीय अध्यक्ष होंगे।
उपधारा (2) केन्द्रीय समिति के सहायता से केन्द्रीय केन्द्रीय अध्यक्ष अनुषांगिक इकाईयो का गठन करेंगे।
उपधारा (3) विशेष समय के लिए विशेष समिति के पदाधिकारियों का चयन केन्द्रीय स्तर से जिला स्तर तक केन्द्रीय अध्यक्ष के निर्देश या अनुशंसा के बाद होंगी।
उपधारा (4) समान विचाधारा वाले दलों के साथ समझौता करने / तोड़ने का अधिकार केन्द्रीय अध्यक्ष को होगा लेकिन बाद में असकी सहमति केन्द्रीय समिति से ले लेनी होगी।
उपधारा (5) केन्द्रीय समिति द्वारा लिए गये निर्णयों को स्वकृत करने या अस्वीकृत करने का अधिकार महाधिवेशन को होगा।
धारा: 3- केन्द्रीय महाधिवेशन – नवजवान सघर्ष मोर्चा का महाधिवेशन 3 वर्ष के अन्तराल में होगा। विशेष परिस्थिति में केन्द्रीय समिति के 2 तिहाई सदयों की सहमति से महाधिवेशन का आपातकालीन आयोजन किया जा सकेगा।
धारा: 4- महाधिवेशन के आयोजन के संबंध में – प्रत्येक समितियों के पास लिखित सूचनायें महाधिवेशन में रखे जानेवाले प्रस्तावों के साथ भेजवाने का दायित्व केन्द्री समिति का होगा। महाधिवेशन के आयोजन के 30 दिन पूर्व ही इस संबंध में सूचनाये पे्रषित की जानी आवश्यक होगी।
धारा: 5- कोरम – अधिवेशन ( सम्मेलन ) या महाधिवेशन मे भाग लेने के लिए केन्द्रीय समिति द्वारा मापदण्ड और संख्या के अनुसार ही निम्न समितियों से प्रतिनिधि भाग लेंगे जो सेविधान में निश्चित प्रावधानों कें अनुसार होगा।

अनुच्छेद – 9
केन्द्रीय समिति

धारा: 1- गठन – महाधिवेशन में पर्यवेक्षक की उपस्थ्मिि में जिले, अनुमण्डल, नगरपालिका / नगर परिसद, प्रखण्ड, एवं अनुषांगिक इकाईयो प्रतिनिधियों में से 151 प्रतिनिधि केन्द्रीय समिति के सदस्य होंगे।
उपधारा (1) केन्द्रीय समिति भी बैठक जिस जिले में आयोजित होगी उस जिले के सभी प्रखण्डों में अध्यक्ष बैठक में केन्द्रीय अध्यक्ष की अनुमति से नामित किये जा सकेंगे।
उपधरा (2) दो महाधिवेशन के अन्तराल में केन्द्रीय समिति सर्वोच्च इकाई होगी।
उपधारा (3) केन्द्रीय समिति निम्न समितियों की अनुशंसाओं की स्वीकृति दे सकती है तथा व्यापक विचार विमर्श के बाद महाधिवेशन के लिये प्रस्ताव के रूप में ग्रहण और स्वीकृत कर सकती है।
उपधारा (4) केन्द्रीय समिति सदस्यता फार्म और सदस्यता के मापदण्ड निर्धारित करेगी। सभी समितियों एवं अनुषांगिक इकाईयों के सदस्यों की सूची केन्द्रीय समिति को भेजना अनिवार्य होगा। समय-समय पर नये सदस्यों के संबंध में निम्न समितियाँ केन्द्रीय समिति को सुचनायें पे्रषित करती रहेंगी।
उपधारा (5) केन्द्रीय समिति हर तीन वर्ष में केन्द्रीय महाधिवेशन बुलायेगी।
धारा: 2- कोरम – बैठक में किसी भी प्रस्ताव को पारीत करने के लिए 55 प्रतिशत सदस्यों की उपस्थिति अनिर्वाय होगी।
धारा: 3- केन्द्रीय समितियों के किसी सदस्य के पद छोड़ने/पद मुक्त करने के बाद केन्द्रीय समिति तत्काल रिक्त पदों पर केन्द्रीय अध्यक्ष की सहमति से सदस्यों को नियुक्त कर सकती है।
धारा: 4- आमंत्रित सदस्यों की नियुक्ति का अधिकार केन्द्रीय अध्यक्ष को होगा।

अनुच्छेद – 10
पदाधिकारियों के कार्यभार

धारा: 1- अध्यक्ष और उसके अधिकार व कत्र्तवय
उपधारा (क) केन्द्रीय अध्यक्ष संगठन का प्रधान पदाधिकारी होगा एवं संगठन का मुख्य वक्ता होगा।
उपधारा (ख) केन्द्रीय समिति के कार्यों एवं नीतियों का दिशा निर्देश अध्यक्ष महाधिवेशन में निर्णय के आधार पर करेगा।
उपधारा (ग) केन्द्रीय अध्यक्ष अपने अपने उत्तरदायित्वों को सहयोगी सदस्यों के बीच वितरित कर सकेगा।
उपधारा (घ) केन्द्रीय समिति की बैठकों की अध्यक्षता करेगा एवं अनुपस्थिति की स्थिति में किसी वरिष्ठ सदस्य को प्रतिनियुक्त करेगा जिसकी लिखित सूचना केन्द्रीय समिति को देनी होगी।
उपधारा (च) केन्द्रीय अध्यक्ष संगठन के किसी भी समिति या अनुषांगिक इकाईयों का निरिक्षण कर इनहें निर्देशित कर सकेगा।
उपधारा (छ) केन्द्रीय अध्यक्ष को केन्द्रीय समिति का विश्वास खोने की स्थिति में दो तिहाई केन्द्रीय समिति के सदस्यों की सहमति से आपतकालिन महाधिवेशन बुलाकर महाधिवेशन के दो तिहाई बहुमत से उन्हे केन्द्रीय अधयक्ष के पद से हटाया जा सकेगा।
धारा: 2- केन्द्रीय प्रधान महाससचिव / केन्द्रीय महासचिव के अधिकार एवं कत्र्तव्य
उपधारा (क) केन्द्रीय प्रधान महासचिव / केन्द्रीय महासचिव संगठन के सभी कार्यलयों के कार्यो के प्रति केन्द्रीय समिति में जिम्मेवार है।
उपधारा (ख) केन्द्रीय प्रधान महासचिव / केन्द्रीय महासचिव के कार्यों में सहायता देने लिए सचिवों का प्रत्यक्ष योगदान होगा।
उपधारा (ग) केन्द्रीय प्रधान महासचिव / केन्द्रीय महासचिव अपने सचिवों को निर्देशित करेंगे, संगठन के विभिन्न स्तरों पर नियुक्तियाँ या पर्यवेक्षण का कार्य महासचिवों के जिम्मे माना जायेगा।
उपधारा (घ) संगठन के सभी कागजातों, प्रकाशनों, प्रत्राचार एवं दस्तावेजों का प्रभारी महासचिव होगा।
उपधारा (च) महासचिवों को हटाने के लिए केन्द्रीय समिति का बहुमत आवश्यक होगा
धारा: 4- उपाध्यक्ष के अधिकार एवं कत्र्तव्य
उपधारा (क) केन्द्रीय अध्यक्ष के अधिकारों का प्रयोग केन्द्रीय अध्यक्ष की अनुमति से केन्द्रीय उपाध्यक्ष कर सकते है।
उपधारा (ख) प्रत्येक केन्द्रीय उपाध्यक्ष अपने संबंधित प्रक्षेत्र मंे समस्त सांगठनिक कार्यों के प्रति केन्द्रीय समिति में जिम्मेवार होंगे।
उपधारा (ग) केन्द्रीय उपाध्यक्ष को पदमुक्त करने के लिए केन्द्रीय समिति की राय से केन्द्रीय अध्यक्ष करेंगे।
धारा: 5- सचिवों के अधिकार एवं कत्र्तव्य
उपधारा (क) सचिवों का कार्य करने को अधिकार महासचिव प्रदान करता है।
उपधारा (ख) प्रत्येक सचिव अपने संबंधित कार्य के संबंध में प्रत्येक बैठक में अपनी रिपोर्ट महासचिव को सौपेंगे।
उपधारा (ग) अगर सचिवों को कार्यों के सम्पादन में किसी अन्य सचिव के कार्यक्षेत्र में हस्तक्षेप करने की आवश्यक्ता महसूस हो तो वह संबंधित विभाग के सचिव को इसकी सूचना लिखित रूप से देगा।
उपधारा (घ) सचिव को पदमुक्त करने हेतु केन्द्रीय अध्यक्ष महासचिव एवं केन्द्रीय समिति से विमर्श करने के उपरांत कर सकते है।
धारा: 6- अन्य पदाधिकारीयों के अधिकार एवं कत्र्तव्य केन्द्रीय अध्यक्ष, कार्यकारी अध्यक्ष केन्द्रीय समिति से विर्मश कर उनके कार्यों का बटवारा करेगा

अनुच्छेद – 11
अनुशासनात्मक कारवाई

धारा: 1- सभी सदस्यों को अनुशासन का पालन करना होगा। अनुशासन भंग करने पर कारण बताओ सूचना, निल्बंन एवं अंत में निष्कासन की करवाई की जा सकेगी।
धारा: 2- केन्द्रीय अध्यक्ष, अनुशासन समिति की सिफारीशों पर केन्द्रीय समिति से विमर्श कर किसी भी खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई कर सकते है।
धारा: 3- केन्द्रीय समिति के अलावा अन्य निचले स्तर में समिति द्वारा लिये गये अनुशासनात्मक कार्रवाई के विरूद्ध जिला समिति, केन्द्रीय समिति, अनुशासन समिति, में अपिल कर सकते हैै।

अनुच्छेद – 12
संवैधानिक सुधार

धारा: 1- संविधान में प्रदत प्रावधानों और अधिकारों की व्याख्या से संबंधित बातों के संबंध में सुधार एवं नई बात जोड़ने के लिए कोई भी सदस्य जिला समिति के माध्यम से अपनी बात लिखित रूप में केन्द्रीय अध्यक्ष के पास भेजेगा।
धारा: 2- संवैधानिक सुधार के लिए केन्द्रीय समिति वर्ष में एक बार विशेष बैठक कर संवैधानिक सुधारों पर विचार विमर्श कर अपना प्रस्ताव महाधिवेशन में प्रस्ताव के रूप में रखेगी।

अनुच्छेद – 13
संवैधानिक अधिकारों का चुनौती

धारा: 1- संगठन के संविधान में प्रदत प्रावधानों, इसके अनुछेदों, धाराआंे एवं उपधाराओं में सुधार की माँग की जा सकती है। लेकिन न तो इसे रद्द किया जा सकता है न इसकी शक्तियों को चुनौती दी जा सकती है।
धारा: 2- इस संविधान के अतिरिकत नवजवान सघर्ष मार्चा के नाम से प्रकाशित एवं प्रचारित अन्य किसी संविधान का अस्तित्व अवैध माना जायेगा।

अनुच्छेद – 14
मोर्चा का कोष एवं बैक एकाउन्ट

धारा: 1- नवजवान सघर्ष मोर्चा का एक राष्ट्रीयकृत बैंक में एकाउन्ट होगा जिसका संचालन केन्द्रीय अध्यक्ष एवं कोषाध्यक्ष संयुक्त रूप से करेंगे।

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